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भारत का पहला कागज रहित न्यायालय बना केरल उच्च न्यायालय

 पहला कागज रहित न्यायालय: केरल उच्च न्यायालय भारत का पहला पेपरलेस कोर्ट बन चुका है| जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) ने 1 जनवरी 2022 को स्मार्ट कोर्ट रूम का उद्घाटन किया है| 

भारत का पहला कागज रहित न्यायालय बना केरल उच्च न्यायालय

पहला कागज रहित न्यायालय: केरल उच्च न्यायालय भारत का पहला पेपरलेस कोर्ट बन चुका है| जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) ने 1 जनवरी 2022 को स्मार्ट कोर्ट रूम का उद्घाटन किया है| इसके पहले चरण में मुख्य न्यायाधीश के कक्ष सहित छह अदालतों को स्मार्ट कोर्ट में बदला जाएगा| साथ ही वकीलों को केस फाइल कंप्यूटर स्क्रीन पर उपलब्ध कराई जाएगी|

 

क्या है पेपरलेस कोर्ट और कैसे करेगा काम : 

पेपरलेस कोर्ट एक ऐसी अदालत है, जो भौतिक कागज के बिना कार्य करती है| जहां सभी न्यायाधीश डिजिटल अदालत के रिकार्ड पर भरोसा कार्य करते हैं| पेपरलेस कोर्ट बनाने की प्रक्रिया के पहले चरण में कोर्ट रूम को स्मार्ट कोर्ट में बदला जाता है| फिर इन अदालतों में वकीलों को केस की फाइलें उनके सामने लगे कंप्यूटर स्क्रीन पर उपलब्ध कराई जाती हैं| साथ ही दस्तावेजों की प्रतियां विरोधी पक्ष और न्यायाधीश के सामने रखे कंप्यूटर पर देखी जा सकती हैं| अदालतों को पेपरलेस करने में ई-कोर्ट ने भी बड़ी भूमिक निभाई है| 


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इस प्रक्रिया के प्रत्येक भाग को न्यायिक प्रक्रिया में व्यक्तिगत हितधारकों और प्रतिभागियों के डैशबोर्ड या वर्चुअल बॉक्स के माध्यम से देखा, संसाधित किया जा सकता है| लिटिगेंट सहित सभी हितधारक अपने घरों, कार्यालयों या पारगमन में आराम से मामलों तक पहुंच सकते हैं, काम कर सकते हैं और अपडेट कर सकते हैं| 


हैदराबाद हाई कोर्ट देश का पहला ई-कोर्ट था, जो जुलाई 2016 में खुला था| ई-कोर्ट परियोजना 2005 में उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रस्तुत की गई थी| यह एक अखिल भारतीय परियोजना है, जिसकी निगरानी ई-समिति द्वारा की जाती है। जिसकी फंडिंग सरकार करती है| 


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