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Factoring Regulation (Amendment) Bill 2021

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This bill seeks to amend section 3 of the existing Act to widen the scope of entities engaged in factoring business by allowing other non-banking financial companies also to carry on factoring business.

Factoring Regulation (Amendment) Bill 2021


Factoring Regulation (Amendment) Bill 2021: Recently, the Factoring Regulation (Amendment) Bill, 2021 has been passed in Parliament. The bill was passed in the Rajya Sabha on July 29, 2021, while the Lok Sabha passed it on July 26, 2021, without discussion, amid opposition from the opposition.

Union Finance Minister Nirmala Sitharaman said that the provisions of this bill will benefit the micro, small and medium enterprises of the country. He further said that MSMEs are facing hardship due to delay in receivables and this bill will ensure healthy cash flow and a smooth working capital cycle in the country.

The main objective of the Factoring Regulation (Amendment) Bill, 2021 is to make the Factoring Regulation Act, 2011 more liberal by increasing the scope of entities engaged in factoring business.

   

Factoring Business: This factoring business is a business where the entity/factor acquires the receivables of another entity known as the assignor for a specified amount.

Amount Receivable: This receivable is an amount that is payable by the customers, also known as debtors, to their assignors for the use of any facility, goods or services.

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(हाल ही मे, संसद में फैक्टरिंग रेगुलेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2021 पास हो गया है| यह बिल राज्यसभा मे 29 जुलाई, 2021 को पारित हुआ जबकि लोकसभा ने विपक्ष के विरोध के बीच, बिना चर्चा के 26 जुलाई, 2021 को पारित कर दिया था|)

(केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि, इस बिल के प्रावधानों से देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को फायदा मिलेगा| उन्होंने आगे कहा कि MSME को प्राप्य में देरी के कारण कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है और यह बिल देश में स्वस्थ नकदी प्रवाह और सुचारू कार्यशील पूंजी चक्र सुनिश्चित करेगा|)

(फैक्टरिंग रेगुलेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2021 का ,मुख्य उद्देश्य फैक्टरिंग व्यवसाय में संलग्न होने वाली संस्थाओं के दायरे को बढ़ाकर, इस फैक्टरिंग विनियमन अधिनियम, 2011 को अधिक उदार बनाना है|)

   

(फैक्टरिंग व्यवसाय: यह फैक्टरिंग व्यवसाय एक ऐसा व्यवसाय है जहां इकाई/ कारक किसी अन्य इकाई की प्राप्तियां हासिल करता है जिसे एक निर्धारित राशि के लिए असाइनर के तौर पर जाना जाता है|)

(प्राप्य राशि: यह प्राप्य राशि एक ऐसी राशि होती है जो ग्राहकों, जिन्हें देनदार के तौर पर भी जाना जाता है, द्वारा किसी भी सुविधा, सामान या सेवाओं के उपयोग के लिए अपने असाइनरों को देय होती है|)

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